ट्रेन की RAC बर्थ पर मिली 35 साल की मोटी-तगड़ी पंजाबन आंटी मनीषा को राजीव ने पहले उंगली से चोदा, फिर टॉयलेट में जोरदार चुदाई की। भारी मम्मे, रसीली झांटों वाली चूत और मोटी गांड वाली आंटी की पूरी देसी सेक्स कहानी पढ़ें।
मैं राजीव , बीस साल का जवान लड़का हूँ। हमारा रिच बिजनेस फैमिली है, पैसों की कोई कमी नहीं। दो महीने पहले अचानक दिल्ली जाना पड़ा। फ्लाइट का टिकट नहीं मिला तो मजबूरी में ट्रेन बुक की। जनरल डिब्बे में भी सिर्फ RAC ही मिला, लेकिन सिर्फ एक रात का सफर था तो मैंने सोचा एडजस्ट कर लूँगा। (लम्बी चुदाई – Click Here)
स्टेशन पर जल्दी पहुँच गया। अपनी बर्थ ढूँढी, सामान रखा और दरवाजे पर खड़ा होकर ताजी हवा लेने लगा। ट्रेन जैसे ही हिली, मैंने देखा – एकदम कयामत ढा रही औरत भागी चली आ रही थी। गोरी-गेंहुई रंगत, भरपूर मांस वाली पंजाबी आंटी। उम्र कोई 35-36 की होगी। लाल रंग की साड़ी में उसका बदन चमक रहा था। ब्लाउज इतना टाइट कि उसके भारी-भारी गोल मम्मे बाहर उछलने को बेकरार थे। भागते वक्त वो मम्मे ऊपर-नीचे उछल रहे थे, मानो दो बड़े-बड़े रसगुले हिल रहे हों। बस एक नजर में ही मेरा लंड पैंट के अंदर सख्त हो गया।
मैंने फटाक से साइड हटकर जगह दी। उसने अपना भारी बैग अंदर उछाला और ट्रेन में चढ़ने की कोशिश की। अचानक पैर फिसला और वो सीधी मेरी तरफ गिरने लगी। मैंने झट से दोनों हाथों से उसकी कमर थाम ली। उसकी नरम-नरम, गर्म कमर हाथ में आई। साड़ी थोड़ी सरकी हुई थी, पेट का मुलायम मांस भी मेरी उंगलियों में दब गया। खुशबू ऐसी कि दिमाग घूम गया।
“अरे बाप रे… थैंक यू बेटा, गिरते-गिरते बचा लिया!” वो हाँफते हुए बोली, उसके भारी मम्मे अभी भी मेरी छाती से सटे हुए थे। (लम्बी चुदाई – Click Here)
“आंटी, चलती ट्रेन में ऐसे चढ़ती हैं? अगर मैं न पकड़ता तो…?”
“बस ट्रैफिक में फँस गई थी यार… नाम मनीषा है मेरा।”
मैंने उसका बैग उठाया और भीतर तक ले गया। जब वो बर्थ पर बैठी तो मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं – यही मेरी सीट थी! दोनों का RAC। भीड़ इतनी कि TTE ने साफ कहा, “एक ही बर्थ पर एडजस्ट कर लो।” मैं मन ही मन खुश हो रहा था।
हम आमने-सामने बैठ गए। उसकी साड़ी का पल्लू बार-बार सरक रहा था, गहरी नेक का ब्लाउज उसके बाएँ मम्मे का आधा से ज्यादा हिस्सा दिखा रहा था। निप्पल का उभार भी साफ नजर आ रहा था। बातें शुरू हुईं।
“मैं राजीव । दिल्ली फैमिली फंक्शन में जा रहा हूँ।”
“मैं सुशमा। पति और बेटी दिल्ली में ही हैं, मैं अमृतसर से आ रही हूँ।”
बातों-बातों में पता चला वो शादीशुदा है, एक 12 साल की बेटी है, पति प्राइवेट जॉब करता है। मिडिल क्लास फैमिली। लेकिन बदन ऐसा कि कोई रानी लग रही थी।
रात होने लगी। मैंने अपना नया सोनी वॉकमैन निकाला।
“ये क्या चीज है बेटा?”
“आंटी, नया वाला है, जॉगिंग के वक्त हाथ में बाँधते हैं। ट्राई करोगी?”
“हाँ-हाँ डाल ना!” (लम्बी चुदाई – Click Here)
मैंने बर्थ बनाई और उसके बिल्कुल पास खिसक गया। वॉकमैन उसकी कलाई पर बाँधते वक्त जान-बूझकर अपने हाथ से उसके बाएँ मम्मे को रगड़ा। वो चुप रही, बस शरमाते हुए मुस्कुराई। एक हाथ उसके कंधे पर रखा, दूसरा कान में ईयरफोन डाला। अब हम दोनों एक ही गाना सुन रहे थे। ट्रेन की हर झटके में मेरा हाथ उसके भारी मम्मे से टकरा रहा था। मेरा लंड पैंट में तंबू बनाए खड़ा था।
रात गहरा गई, लाइट्स बंद हो गईं।
“आंटी आप लेट जाओ, मैं बैठा रहूँगा।”
“नहीं-नहीं, दोनों बैठे रहेंगे।”
मैंने अपना पोर्टेबल DVD प्लेयर निकाला। जान-बूझकर एक ब्लू फिल्म वाली CD पहले से ही रखी थी।
“ये क्या है राजीव ?”
“पोर्टेबल DVD आंटी, मूवी देख लो।” (लम्बी चुदाई – Click Here)
मैं लेट गया, पैर उसकी तरफ फैलाए। वो दीवार से पीठ टिकाकर बैठी रही। मेरे पैर बार-बार उसकी भारी-भारी मुलायम जाँघों और गोल-गोल चूतड़ों से टकरा रहे थे। उसकी गर्मी महसूस हो रही थी।
रात के करीब डेढ़ बजे वो टॉयलेट गई। साड़ी उसके गहरे गांड के खांचे में फँसी हुई थी। दोनों चूतड़ हिल-हिल कर चल रहे थे, मानो दो बड़े-बड़े पके आम लहरा रहे हों। मेरा लंड फटने को था।
वापस आकर उसने चुपके से CD चेंज की। जैसे ही फिल्म शुरू हुई – दो जिस्म आपस में लिपटे हुए, चुदाई के सीन – उसकी आँखें चौड़ी हो गईं। उसने इधर-उधर देखा, मुझे सोया समझकर फिर स्क्रीन में खो गई। साँसें तेज, मम्मे ऊपर-नीचे, वो बार-बार पैर फैलाती और सिकोड़ती, जाँघें आपस में रगड़ रही थी।
मैंने धीरे से उसका पैर छुआ। वो चौंकी, लेकिन मैंने आँखें बंद रखीं। फिर धीरे-धीरे साड़ी-पेटीकोट के अंदर हाथ डाला। उसकी जाँघें गर्म और नरम। पहले उसने जाँघें बंद करने की कोशिश की, लेकिन उसकी चूत से इतनी गर्मी आ रही थी कि दो मिनट में ही उसने पैर फैला दिए। मेरी उंगलियाँ उसकी पैंटी तक पहुँचीं – पूरी गीली। मैंने पैंटी साइड की और नंगी चूत पर उंगली फेरी। घनी झांटें, बहुत गर्म और रसीली चूत।
वो हल्के से कराही – “स्स्स्स… आह्ह…”
मैंने दो उंगलियाँ अंदर डाल दीं। वो काँपने लगी। उसकी चूत ने मेरी उंगलियों को जोर से भींचा और वो झड़ गई। मैंने उंगलियाँ निकाल कर चाटीं – नमकीन-मीठी स्वाद। उसने शरमाते हुए मुस्कुरा कर मेरी तरफ देखा।
दो मिनट बाद मैं टॉयलेट की तरफ उठा। वो भी चुपके से पीछे-पीछे आ गई। जैसे ही कॉरिडोर में पहुँचे, उसने मुझे जोर से गले लगा लिया। उसके भारी-भारी मम्मे मेरी छाती पर दब गए।
“संयज्ज… तूने तो मुझे पागल कर दिया रे…” (लम्बी चुदाई – Click Here)
मैंने दोनों हाथों से उसकी मोटी-मुलायम गांड दबोच ली और खुद से चिपका लिया। मेरा 8 इंच का मोटा लंड उसकी नाभि पर चुभ रहा था। उसने खुद ही पलटी, टॉयलेट का दरवाजा खोलकर अंदर घुसी और मुझे अंदर खींच लिया। दरवाजा बंद किया और घुटनों पर बैठ गई। मेरी पैंट की जिप खोली और लंड बाहर निकाल कर मुँह में ले लिया।
“आह्ह मनीषा आंटी… क्या मुँह है तेरा…”
वो लंड को गले तक ले रही थी, जीभ से चाट रही थी। दो मिनट में ही मैं उसके मुँह में झड़ गया। उसने एक बूंद नहीं गिरने दी, सब पी गई। फिर खड़ी हुई, साड़ी-पेटीकोट कमर तक ऊपर उठाया, पैंटी नीचे सरका दी और दीवार का सहारा लेकर कमर झुका ली।
उसकी चूत से रस टपक रहा था। मैं पीछे से घुटने टेक कर उसकी जाँघें चाटने लगा। फिर गांड के खांचे में जीभ डाल दी। वो पागलों की तरह सिसकने लगी।
“ऐस्स्से… गंदा है… आह्ह्ह… मत करो… ओह्ह्ह गॉड…”
“चुप… मजा लो आंटी…”
उसकी चूत और गांड को खूब चाटा। वो फिर झड़ गई, पैर काँप रहे थे। अब मेरा लंड फिर तन गया। मैं खड़ा हुआ, लंड उसकी चूत पर रगड़ा। वो खुद पीछे धकेलने लगी। एक ही जोर के झटके में पूरा 8 इंच का लंड उसकी टाइट चूत में समा गया। (लम्बी चुदाई – Click Here)
“आआह्ह्ह्ह राजीव … फाड़ दी रे… जोर-जोर से… आज तक किसी ने इतना मोटा नहीं चोदा…”
मैंने उसके भारी मम्मे ब्लाउज के ऊपर से मसलने शुरू कर दिए। निप्पल को चुटकी में पकड़ कर खींचा। वो चिल्लाने लगी –
“हाँ… ऐसे ही… फाड़ दो मेरी चूत… आह्ह्ह… मारो जोर से…”
ट्रेन की खिड़की से ठंडी हवा आ रही थी, उसके बाल मेरे मुँह पर उड़ रहे थे। मैंने कमर पकड़ कर ताबड़तोड़ धक्के मारने शुरू किए। उसकी चूत की गर्मी, टाइटनेस… कमाल थी। दस-पंद्रह मिनट की जोरदार चुदाई के बाद वो तीसरी बार जोर से झड़ी और मैंने भी उसकी चूत के सबसे अंदर अपनी गर्म वीर्य की मोटी-मोटी पिचकारियाँ मार दीं।
लंड निकाला, उसकी पैंटी वापस चढ़ाई, साड़ी ठीक की। वो पलटी, मुझे गहरा किस किया और फिर घुटनों पर बैठकर मेरा लंड चाट-चाट कर चमकदार साफ कर दिया।
अब जब भी दिल्ली जाता हूँ, मनीषा आंटी को होटल बुलाता हूँ। पूरे दिन-रात चुदाई करते हैं। कभी डॉगी, कभी मिशनरी, कभी 69। उसे मेरा मोटा लंबा लंड बहुत पसंद है और मुझे उसकी रसीली, झांटों वाली पंजाबन चूत और भिगोती है। (लम्बी चुदाई – Click Here)