मेरा नाम प्रमोद है और मेरी उम्र 27 साल है। मेरी बड़ी बहन निराली 40 साल की है। उसकी इकलौती बेटी कनक अब 19 साल की हो गई है। मैं अक्सर निराली के घर जाता रहता हूँ।
मैं अपना ज़्यादातर समय उसके कमरे में बिताता हूँ, लेकिन हाल ही में कनक को देखना थोड़ा अलग हो गया है।
पहले मैं सिर्फ़ अपनी बड़ी बहन के साथ ही समय बिताता था, लेकिन कनक अब बड़ी हो गई है।
उसके चूचे और फिगर को देखकर मेरे मन में एक अजीब सा आकर्षण होने लगा था।
कई बार मेरी नज़र उसके चूचो पर अटक जाती और वो उन्हें देखती, लेकिन कुछ नहीं कहती। मुझे पता था कि इस माहौल का असर उस पर भी पड़ रहा है।
एक रात मैं अपनी बड़ी बहन के कमरे में था, जब कनक दरवाज़े के पास खड़ी थी।
शायद वो हमारी बातचीत सुन रही थी, लेकिन मैंने उसे अनदेखा कर दिया। मैंने अपनी बड़ी बहन से कहा, “दीदी, अब कनक भी बड़ी हो गई है। तुमने कहा था कि हमें उसके साथ भी मज़े करने हैं।”
दीदी हंस पड़ी और बोली, “वो तुम्हारी भतीजी है, जो चाहो करो। वो बड़ी हो गई है तो उसे चोदो। जब मैं कनक की उम्र की थी, तब मैंने कई लंडों से सेक्स किया था।”
उसकी ये बातें सुनकर मेरे अंदर का प्यासा जानवर जाग उठा। मैं जानता था कि दीदी मुझ पर पूरा भरोसा करती है। उसी रात दीदी ने मुझे कनक के कमरे में भेज दिया।
जब मैं कनक के कमरे में गया, तो दरवाजा खुला था। मैं खुद को रोक नहीं पाया।
मैं उसकी चिकनी जांघों को उसकी मैक्सी के नीचे से झांकते हुए देख सकता था। एक चूचा बाहर निकला हुआ था, मानो जानबूझकर मुझे दिखना चाह रहा हो।
मैं उसके पास गया और उसकी जांघों पर झुक गया। वो आँखें बंद करके लेटी रही। मैंने धीरे से उसकी चूत को सहलाया और अपने मुँह से उसे चूमा। मेरा पूरा शरीर करंट की तरह झनझना उठा।
“क्या बढ़िया चीज़ है,” मैंने फुसफुसाते हुए कहा, “अब मैं माँ के साथ बेटी का भी मज़ा लूँगा।”
कनक ने आँखें खोली और मेरी तरफ देखा, लेकिन कुछ नहीं बोली।
“तुम्हारी माँ ने मुझे भेजा है, बेबी। तुम भी उनकी तरह मज़ा लो।”
मैंने उसके चूचो को कस कर दबाना शुरू कर दिया और उसने धीरे-धीरे अपनी जाँघें और फैला दीं।
जब मैंने कनक की जाँघों को सहलाया, तो उसकी साँसें तेज़ हो गईं।
मैं अपने हाथों में उसके शरीर की गर्मी महसूस कर सकता था। वह अभी भी आँखें बंद करके लेटी हुई थी, लेकिन उसके चूचे सख्त हो गए थे।
“क्या बात है मेरी जान, यह तुम्हारा पहली बार है, है न?” मैंने उसके कान में धीरे से फुसफुसाया।
कनक ने धीमी आवाज़ में कहा, मम्मी को मत बताना।”
मैं हँसा। “अरे पगली, तुम्हारी माँ ने मुझे भेजा है। उसने कहा है कि अब मुझे तुम्हारी चूत भी खोलनी है। तुम बहुत दिनों से लाइन में लगी हो।”
मैंने उसके होंठों को अपने होंठों से दबाया। वह थोड़ी झिझकी, लेकिन फिर मेरे साथ बहने लगी।
“अब तुम बिल्कुल अपनी माँ जैसी दिखती हो,” मैंने कहा और उसकी मैक्सी को पूरी तरह से ऊपर खींच दिया। अब उसकी चूत मेरे सामने थी एकदम चूत और गुलाबी|
“ओह, मैंने तुम्हारी माँ की चूत का मज़ा लिया है, अब मैं तुम्हारी भी चूत का स्वाद चखूँगा,” मैंने कहा और नीचे झुक कर उसकी चूत पर अपनी जीभ फिराई।
“अह्ह्ह मामा ,”कनक तड़प उठी और उसकी कमर ऊपर उठने लगी। मैं समझ गया कि वो पूरी तरह से तैयार है।
मैंने अपने हाथों से उसकी जाँघें फैलाईं और अपनी जीभ से उसकी चूत चाटने लगा। उसका पूरा शरीर बेचैन था और मैं जानता था कि पहली बार का नशा उसे कहीं और ले जा रहा था।
“मामा प्लीज़… अभी करो,” उसने अपनी आँखें खोलीं और मेरी तरफ़ देखा।
“अभी नहीं, बेबी। मैं तुम्हें अच्छे से तैयार कर रहा हूँ,” मैंने मुस्कुराते हुए कहा और उसके निप्पल चूसने लगा। उसके चूचे अब मेरे मुँह में थे और मैं उन्हें एक-एक करके दबा रहा था और चूस रहा था।
कनक ने अपने हाथों से मेरे बाल पकड़ लिए। “मामा अब मैं नहीं रुक सकती,” उसने धीरे से कहा।
“ठीक है, अब मैं तुम्हारी चूत को मर्दानगी का स्वाद चखाऊँगा,” मैंने कहा और अपनी पैंट उतार दी।
जब मैंने अपना लंड उसकी चूत के पास ले गया, तो उसकी आँखें चौड़ी हो गईं। “बहुत बड़ा!” उसने कहा।
“तुम पहली बार देख रही हो, पर डरो मत। तुम्हारी माँ भी इससे उत्तेजित हो जाती है,” मैंने कहा और उसकी जाँघों के बीच घुटनों के बल बैठ गया।
धीरे से मैंने अपने लंड का टोपा उसकी चूत पर रख दिया। कनक ने थोड़ा पीछे हटने की कोशिश की, पर मैंने उसकी कमर पकड़ कर उसे वहीं पर रोक लिया।
कनक अब पूरी तरह से मुझमें खो चुकी थी। उसकी साँसें तेज़ चल रही थीं, और मैंने उसके शरीर को कस कर पकड़ रखा था।
उसके चूचे मेरी हथेलियों में थे, और उसकी आँखें मेरे लंड पर टिकी थीं, जो उसकी चूत के द्वार पर खड़ा था।
“मामा…धीरे से करो,” कनक ने मेरी आँखों में देखते हुए कहा।
हल्की मुस्कान के साथ मैंने उसकी जाँघों को और फैला दिया, ताकि उसकी चूत मेरे लंड का पूरी तरह से स्वागत करने के लिए तैयार हो सके।
“डरो मत मेरी जान, तुम्हें इसका पूरा मज़ा आएगा,” मैंने कहा और धीरे से अपने लंड का टोपा उसकी चूत की दरार पर रख दिया।
कनक की चूत गीली हो चुकी थी, पर पहली बार के लिए अभी भी थोड़ी टाइट थी।
मुझे पता था कि पहली बार दर्द होगा, इसलिए मैंने पहले अपना लंड उसकी चूत के द्वार पर रगड़ना शुरू किया।
मेरी जीभ उसके निप्पलों पर घूम रही थी, और मैं अपने मुँह से उसके शरीर के हर हिस्से को चूमते हुए आगे बढ़ रहा था।
“आआह मामा बहुत अच्छा लग रहा है,” कनक ने अपनी आँखें बंद कर लीं और अपने हाथों से मेरा सिर पकड़ लिया।
मैंने धीरे से लंड को उसके अंदर धकेला। जैसे ही लंड का टोपा अंदर गया, कनक की कमर ऊपर उठ गई।
“आआह मामा बहुत दर्द हो रहा है!” वह धीरे से चिल्लाई।
मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रखे और धीरे-धीरे अंदर की ओर घुसेड़ना शुरू किया। “बस थोड़ी देर, फिर मज़ा आएगा,” मैंने उसके कान में फुसफुसाया।
अब मेरा आधा लंड उसकी चूत में था। कनक की कसी हुई चूत मेरे लंड को कस कर पकड़े हुए थी। मैं रुका और उसके निप्पलों को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगा।
इससे उसका ध्यान भंग हुआ और मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड उसकी चूत में घुसेड़ दिया।
“आआआह मामा पूरा अंदर चला गया!” कनक ने मेरी कमर पकड़ी और अपने नाखून मेरी पीठ पर गड़ा दिए।
“तुम बहुत टाइट हो मेरी जान, अब तुम्हें चोदने में मज़ा आएगा,” मैंने कहा और धीरे-धीरे अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया।
अब मैं उसके ऊपर झुका हुआ था और मेरे लंड के हर धक्के के साथ उसकी गांड हिल रही थी। कनक की आँखें अब मेरी आँखों से मिलीं और उसकी साँसें तेज़ हो गईं।
“ओह मामा…आआह! और तेज़ करो!” उसने कहा और अपनी टाँगें मेरी कमर के चारों ओर लपेट लीं।
मैंने उसकी बात मान ली और पूरी ताकत से उसे चोदना शुरू कर दिया। उसका बिस्तर चरमरा रहा था और उसकी चुदाई की आवाज़ पूरे कमरे में गूंज रही थी।
“आआआह मामा बस करो, बहुत हो गया,” उसने कहा, लेकिन मुझे पता था कि अब उसे मज़ा आ रहा है।
मैं नहीं रुका, मैं उसके चूचो को कस कर पकड़े हुए उसे चोदता रहा। उसकी चूत अब मेरे लंड के हिसाब से ढल रही थी और हर धक्के के साथ वो मुझे और कस कर पकड़ रही थी।
“आआआह मामा मम्मी की तरह मुझे चोदते रहो,” कनक बोली और मेरे लंड पर झुक कर उसे चूसने लगी।
“अभी रुको, मेरी जान। यह तो बस शुरुआत है,” मैंने कहा और उसे पलट कर पेट के बल लिटा दिया।
अब उसकी चिकनी गांड मेरे सामने थी। मैंने फिर से अपना लंड उसकी चूत में डाला और पीछे से उसे जोर से चोदना शुरू कर दिया।
उसकी गांड की गोलाई मेरे पेट से टकरा रही थी और उसकी चूत अब पूरी तरह गीली हो चुकी थी।
“ओह मामा आआआह! बहुत अच्छा लग रहा है,” उसने कहा और मेरे धक्कों के हिसाब से अपनी कमर आगे-पीछे हिलाने लगी।
अब मैंने उसकी गर्दन पकड़ी और उसे अपनी ओर खींचा और उसके होंठों को अपने होंठों से दबा लिया।
उसकी जीभ मेरे मुँह में घूम रही थी और हम दोनों एक दूसरे के साथ पूरी तरह से मग्न हो चुके थे।
“अब मैं इसे अंदर डालने जा रहा हूँ,” मैंने कहा और अपना लंड उसके अंदर और भी गहराई तक धकेल दिया।
“हाँ मामा, डाल दो, मैं तैयार हूँ,” कनक ने कहा और उसकी चूत को और भी कस कर पकड़ लिया।
अब मैंने और तेज़ी से धक्के लगाने शुरू कर दिए और कुछ ही देर में मेरा सारा माल उसकी चूत के अंदर ही फूट पड़ा। कनक ने भी मेरे शरीर को कस कर पकड़ लिया और काँपने लगी।
हम दोनों एक दूसरे से लिपटे हुए थे और पसीने से भीगे हुए थे।
“अब तुम पूरी तरह से मेरी हो,” मैंने कहा और उसके माथे को चूमा।
“हाँ मामा, अब मुझे रोज़ चोदना,” उसने मुस्कुराते हुए कहा।
उस रात हमने 3 बार और चुदाई करी। जैसे ही पहली बार का नशा उतरा, कनक ने खुद ही मुझे पकड़ लिया और मेरा लंड अपनी चूत में डलवा लिया।
अब जब भी मैं दीदी के घर आता हूँ, कनक हमेशा मेरे लिए तैयार रहती है। आते ही पहले दीदी की प्यास भुजाता हु उसके बाद कनक का नंबर लगाता हु।