बात उन दिनों की है जब एक साल पहले मैं दिल्ली में जॉब करता था। मैं दो दिन के लिए हरयाणा अपने घर गया था। वहा से फ़िर मुझे वापस दिल्ली आना था।
मैं शाम को अम्बाला स्टेशन पर पंहुचा, ट्रेन आने वाली थी और मेरी निगाहें औरतो को देख रही थी। तभी मैंने देखा एक औरत मेरी तरफ देख रही थी। उसकी उमर 30 के आस-पास होगी।
उसके चूतड़ों को मैं देखता ही रह गया, एकदम गोल-मटोल थे जो चलने पर ऊपर-नीचे हो रहे थे, दिल कर रहा था जाकर दबा दू। तभी ट्रेन आ गई। Read – गर्ल्स हॉस्टल की रैगिंग में लेस्बियन सेक्स | Girls Hostel Lesbian Ragging Sex
मैं उस औरत के साथ-साथ अन्दर गया। ट्रेन में काफी भीड़ थी, मैं उस से चिपक कर खड़ा हो गया। इसी दौरान गाड़ी चल पड़ी। तभी मैंने महसूस किया की मेरा लण्ड खड़ा हो गया है जो की बिलकुल उसकी गाण्ड के बीच में चिपका हुआ था।
गाड़ी तेज चल रही थी जिससे यात्री इधर उधर हिल रहे थे, मुझे मजा आ रहा था। भीड़ होने के कारण मेरे हाथ कभी-कभी उसकी गर्दन को छू जाते थे।
उसको भी मजा आने लगा, वो भी मेरे लण्ड पर दबाव डालने लगी। मैंने तभी उसके चूतड़ों पर हाथ लगा दिया, बहुत मुलायम थे।
मेरा लण्ड उसकी गाण्ड में धंसा जा रहा था, मैं पागल सा होने लगा था। थोड़ी देर बाद उसने मुझसे पूछा- यह ट्रेन सोनीपत कब पहुंचेगी?मैंने कहा- यह तो सोनीपत रुकेगी ही नहीं! तब उसने कहा- मुझे तो सोनीपत जाना है।
मैंने कहा- फ़िर तो पानीपत उतर कर, वहा से लोकल ट्रेन पकड़ लेना।उसने कहा- सर्दी का समय है इसलिए ट्रेन में लोग भी कम होंगे सो रात को मैं अकेले कैसे जाऊूँगी?
मैंने कहा- कोई बात नहीं मैं आपके साथ चला चलूँगा। यह कहकर मैंने उसके कूल्हे दबा दिए । शायद वो भी यही चाहती थी, तभी उसने ‘हा’ कर दी। Read – गर्ल्स हॉस्टल की रैगिंग में लेस्बियन सेक्स | Girls Hostel Lesbian Ragging Sex
फ़िर हम पानीपत उतर गए, काफी रात हो गई थी, वहा पहले से ही लोकल ट्रेन खाली थी, हम उसमें चढ़ गए। तभी ट्रेन चल दी, मैंने देखा की सर्दी और रात के कारण उस डिब्बे में कोई नहीं था। इस बात से मैं बहुत खुश हो गया।
इसी दौरान गाड़ी ने गति पकड़ ली और मैंने दरवाजा बन्द कर दिया, फ़िर उसके साथ सट कर बैठ गया। वो पहले ही गरम हो चुकी थी। उसने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया और अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए।
मैं पागलों की तरह उसके होंठ चूसता रहा और मेरे हाथ उसके शरीर पर घूमने लगे। मैं हब्शी की तरह उस पर टूट पड़ा, ऐसे जैसे की किसी ने बरसों से खाना ना खाया हो।
उनके स्तनों को मैं इतने ज़ोर-ज़ोर से दबा रहा था की वो बुरी तरह थरथरा रही थी। उसका एक हाथ मेरे लण्ड को सहलाने लगा और मैं उसकी चूँचियो को दबाते हुए बुर पर हाथ रगड़ने लगा और वह अपनी दोनों जांघो के बीच मेरे हाथ को दबाने लगी।
तभी ट्रेन रुक गई वो भी एक सुनसान जगह पर! अब तो मेरी खुशी का ठिकाना ही नहीं था! फ़िर मैंने अपना लण्ड बाहर निकाल कर उसके हाथ में दे दिया। उसने मेरे लंड को मुँह में भर लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी।
ऐसा लगा जैसे मैं तो जन्नत में पहुंच गया। फ़िर मैंने उसका ब्लाउज खोल दिया और उसके मम्मों के निप्पल को चूसने लगा।उत्तेजनावश हम 69 की पोजीशन में आ गए Read – गर्ल्स हॉस्टल की रैगिंग में लेस्बियन सेक्स | Girls Hostel Lesbian Ragging Sex
मैं उसकी चूत को चाट रहा था और वो मेरा लंड चूस रही थी। मेरा लंड उसके मुँह में पूरा अन्दर चला गया। मैंने अपनी जीभ से उनकी चूत की फांको को चौड़ा किया, वो बिलकुल ऐसे थी, जैसे कोई मोटा सा अनार का फूला हुआ सा दाना हो।
मैंने उस पर पहले तो जीभ फिराई बाद में उसे दांतो से दबा दिया। उसकी हालत तो पहले से ही ख़राब थी- ओह… जोर से चूसो… ओह… मैं तो गई ऊईई… माूँ…! कोई 5-7 मिनट की चुसाई के बाद मुझे लगा की अब इसकी चूत चुदने के लिए तैयार है !
तो मैंने अपना लंड उसकी चूत पर सटाया और उसकी भग्नासा पर लंड का सुपाड़ा रगड़ना शुरू किया, तो वह अपनी गांड को ऊपर उठाने लगी की लण्ड जल्दी से उसकी चूत में घुस जाए पर मैं उसको तड़पाना चाहता था और उसके मुँह से सुनना चाहता था।
जब लंड को रगड़ा तो वह तड़प उठी और बोली- अब और मत तड़पाओ… इसको मेरी चूत में डाल दो.. मेरी चूत को फाड़ दो..! मैं पिछले आठ महीनों से नहीं चुदी हूँ, आज इसकी चुदने की सारी ख्वाहिश पूरी कर दो..! इसी दौरान गाड़ी चल पड़ी।
मैं अपना लण्ड चूत के मुख पर रख कर ऊपर-नीचे घिसता रहा और फ़िर जोर से एक झटका दिया तो आधा लण्ड अन्दर घुस गया। फ़िर मैंने एक और धक्का मार कर अपना लंड एक ही बार में पूरा-का-पूरा उसकी चूत में डाल ददया। Read – गर्ल्स हॉस्टल की रैगिंग में लेस्बियन सेक्स | Girls Hostel Lesbian Ragging Sex
वह चिल्ला पड़ी, मैंने तुरन्त उसकी चीख को अपने होंठों से दबा दिया और धीरे-धीरे अपने लंड को अन्दर-बाहर करने लगा।
अब वह कामुक साँसे ले रही थी। कुछ ही धक्कों के बाद अब वह झड़ने वाली थी और उत्तेजना के मारे बड़बड़ा रही थी, “और ज़ोर से.. और ज़ोर से…!”
मैं अब लम्बे-लम्बे झटके देने लगा और दो मिनट के बाद हम दोनों एक ही साथ झड़ गए। कुछ देर निढाल रहने के बाद हम ठीक से बैठ गए।
वो मेरे लंड को हाथ में लेकर आगे-पीछे करती रही और मैं उसको चूमता रहा। इतने में सोनीपत आ गया। ट्रेन से उतरते समय उसने मुझे चूमा, मैंने उसका नम्बर ले लिया और फ़िर वो उतर गई। Read – गर्ल्स हॉस्टल की रैगिंग में लेस्बियन सेक्स | Girls Hostel Lesbian Ragging Sex